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क्या होती है माडर्न आर्ट ?

भारत वर्ष

चित्रकला की उत्पत्ति का उल्लेख वेदों में प्राप्त होता है | तथा शस्त्रीय नियमों का उल्लेख विष्णुधर्मेत्तर पुराण में विस्तार से दिया गया है |

आधुनिक कला

जहाँ तक आधुनिक कला के प्रारंभ एवं विकास का प्रश्न है, तो आप इसे इस प्रकार समझ सकते है कि जब कलाकारों ने कला के शास्त्रीय नियमों को छोड़कर अपने सुख के लिए चित्र में विभिन्न प्रतीकों के माध्यम से प्रभाव उत्पन्न करने का प्रयास करना प्रारंभ किया तो उसे ही आधुनिक कला के रूप में हम जानते है |

विषय के अनुसार कलाकारों ने उन प्रतीकों के प्रयोग प्रारंभ कर दिए जो आवश्यक भावों को व्यक्त करने में समर्थ थे | इसके लिए कलाकारों ने जहाँ अपनी कल्पनाशक्ति से रूप – आकार गढे वही रंगों के माध्यम से सभी कलाकारों ने सफल अभिव्यक्ति कर डाली | इस प्रकार के चित्रों को आधुनिक चित्रकला की श्रेणी में रखा जाता है |

सामान्यतःआधुनिक कला को 1860 से 1970  के काल खंड का सृजन माना जाता है | सामान्यत: आप यह मान सकते है कि अतीत की कला को पीछे छोड़ते हुए इस नवीन कला के सृजन को  आधुनिक कला कहा गया |

माडर्न आर्ट का प्रारम्भ –

इसका प्रारंभ विन्सेंट ,वेन गोग, पॉल सिजैन, गागुइन, श्योरा एवं हेनरी इत्यादि इतिहास के महान चित्रकारों ने किया था | 20 सदी के प्रारंभ में हेनरी मौतिस एवं उनके समकालीन कलाकारों जैसे ब्राक ,डीरेन एवं डफी आदि ने जीवंत एवं बहुरंगी चित्रकारी कर चित्रकला की दुनिया को बदलने का सफ़ल प्रयास किया यद्यपि आलोचक इस प्रकार की कला को फौविस्म के नाम से इंगित करते है |

20 सदी के  पूर्व ही चित्रकला में विभिन्न स्टाइल प्रचलित होने लगे थे | जैसे घन , शंकु , पिरामिड एवं आड़ी – तिरछी  रेखाओं का  रेखाकन, स्वनिर्मित अनगढ़ आकार रंग इत्यादि | कालान्तर में इन विभिन्न पद्धतिओं को चित्रकला में आंदोलनों के रूप में जाना गया जैसे घनवाद , प्रभाववाद, प्रतीक वाद , अभिव्यंजनावाद , यथार्थवाद इत्यादि |

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