यूनान की कला में प्रमुख कला सम्प्रदाय

यूनानी कला के स्वर्ण युग में कला के दो सम्प्रदाय पनपे एक पेलोपोनेशियन का केंद्र ओलंपिया तथा दूसरा एटिक जिसका केंद्र एथीना था |ये दोनों यूनान की शास्त्रीय कला के आरंभिक स्कूल /सम्प्रदाय माने जाते हैं | इनका समय पांचवीं शताब्दी उत्तरार्ध का माना जाता है | लगभग इसी समय एथेंस में प्राचीन एटिक सम्प्रदाय क्रियाशील था | इससे पूर्व पांचवी सदी के अंतिम चरण में आयोनियनसम्प्रदाय / स्कूल का कार्य भी बहुत लोकप्रिय था |अन्य महत्वपूर्ण यूनानी कला सम्प्रदायों में सीक्योनियन सम्प्रदाय तथा थीवन एटिक सम्प्रदाय को माना जाता है | ये दोनों सम्प्रदाय ई. पूर्व चौथी शदी  के माने जाते हैं |

आरम्भिक शास्त्रीय युग के प्राचीन

एटिक सम्प्रदाय – की कोई कृति शेष नही है , इसका समय पांचवीं सदी ई. पूर्व (470 से 460) का माना जाता है तथा इसके प्रमुख कलाकारों में पालिग्नोतास हैं तथा प्राय: सार्वजानिक भवनों की भित्तियों को चित्रांकित किया गया है | ट्राय का घेरा , ओदिसस  की यात्रायें , लूकिप्पीदी का बलात्कार तथा एकेलीस आदि के प्रमुख चित्र हैं |

आयोनियन सम्प्रदाय – इसका समय 460 से ४०० ई. पूर्व का माना जाता है | यह तत्कालीन समय का अत्यंत लोकप्रिय सम्प्रदाय /स्कूल  माना जाता है | इस सम्प्रदाय के महत्वपूर्ण चित्रकारों में ज्युक्सिस तथा पेरेसिअस को माना जाता है | ज्युक्सिस( प्रथम चित्र )के इरोस की आकृति  (अंतिम चित्र ) बुढ़िया की आकृति सर्वाधिक प्रसिद्द हेलेन, सेंटौर(नर अश्व ) मार्सीयास (युद्ध का देवता ) शिशु हेराक्लीस इत्यादि हैं | पेरसिअस ज्युक्सिस का प्रतिद्वंदी था वास्तविक चित्रांकन में निपुण था | तीन देवता (मेलोग्रस , हेराक्लेस , परस्युस )एजेनियन प्रजातंत्र की मानवाकृति हिप्पोलीतास पागल का बहाना करता ओदोसिअस , सेवक सहित पुजारी , शिशु सहित थर्शियन नर्स इत्यादि हैं | मानवाकृति के अनुपात , मुखाकृति के भावों  एवं केशविन्यास के साथ रेखांकन का अद्वितीय आचार्य था |

सीक्योनियन सम्प्रदाय – इसका प्रमुख केंद्र कोरेंथ तथा सीक्योंन था | पांचवीं सदी ई. पूर्व इस क्षेत्र का कला के क्षेत्र में कोई ख़ास विकास नही हुआ , संभवतः पालीग्नोतास के कारण चित्रकला का मुख्य केंद्र एटिका ही गया था |यहाँ के चित्रकारों में युपोम्पोस इसे सीक्योनियन सम्प्रदाय का संस्थापक माना जाता है | इसका प्रतिभा शाली शिष्य पेम्पीलोस था पेम्फिलोस के शिष्य पोसियास एवं एपीलीस विशेह प्रसिद्द हुए | एक अन्य शिष्य मेलान्थियस ने चौथी सदी ई. पूर्व चित्रकला पर एक ग्रन्थ लिखा था तथा सीक्योन के निरंकुश शासक एरिस्टाटॉस का व्यक्ति चित्र बनया था जिसमे निकट ही विजय की देवी (nike) अपना रथ बढ़ा रही हैं | इस चित्र को बनाने में एपेलीस तथा सिक्योन के समय के अन्य चित्रकारों ने भी कार्य किया था | इस सम्प्रदाय का अंतिम श्रेष्ठ कलाकार तिमान्थीस था | इसकी कृति एफिजेनिया का बलिदान काम (eros) सोती हुई सैक्लोप तथा एफीसोस में पालामेदीस की हत्या आदि श्रेष्ठ चित्र हैं |

थीवन एटिक सम्प्रदाय – यूनान की कला का यह चौथा प्रमुख सम्प्रदाय था | इसके प्रमुख चित्रकार निकोमेकस  का शिष्य एरीस्तदीज करूँ दृश्यों को बनाने में माहिर था | इस सम्प्रदाय के विशेष प्रमाण उपलब्ध नही हैं | किन्तु इन थोड़े से प्रमाणों से तत्कालीन प्रवृत्तियों का परिचय मिल जाता हैं |

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