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समय प्रबंधन से व्यक्तित्व विकास के सरल सूत्र

ओप्पो दीपो भवः “महात्मा बुद्ध का कहना है कि स्वयं ही दीपक बनें |”

आज का विमर्श आत्मविश्लेषण पर आधारित है |

आत्म विश्लेषण हमारे व्यक्तित्व को किस प्रकार  विकसित करता है |

पिछले एपिसोड में व्यक्तित्व विकास के लिए  आत्म विश्लेषण की महत्ता बताते हुए, आत्मविश्लेषण की प्रक्रिया का विवरण प्रस्तुत किया था | और ये समझाने का प्रयास किया था | कि आत्मविश्लेषण ही वह मुख्य कारक है | जो  हमारे अन्दर  के आत्मविश्वास में वृद्धि कर हमारे व्यक्तित्व को पुष्पित और मुखरित करता है | आप सभी को मेरा यह परामर्श है की आप पर्सनालिटी  डेवलपमेंट की श्रंखला को क्रमवार देखे और आत्मसात  करे |

सामान्य अर्थों में आत्मविश्लेषण स्वयं का अवलोकन कर स्वयं की कमियां खोजकर उन्हें दूर करने की नैसर्गिक  पद्धति है |

यह बात अलग है कि आज के दौर में हम सामान्यतः प्रकृति के नियमों का न ही पालन कर पाते है और न ही करने का प्रयास करते है | आत्मविश्लेषण की प्रक्रिया के अंतर्गत  हमारे द्वारा की गई दिन भर  की गतिविधिओं की दिन के अंत में  शांत व् एकाग्र मन से समीक्षा  की जाती है | निष्कर्षतः नकारात्मकता एवं दुर्गुणों  के त्याग का संकल्प व् सकारात्मकता एवं सद्गुणों को आत्मसात करके जीवन को सफल बनाने का  प्रयास होता है |

परिणाम स्वरुप आत्मविश्वास से हमारा व्यक्तित्व प्रभावशाली बनने लगता है | आत्मविश्लेषण की प्रक्रिया में शांत भाव धारण करके ,एकाग्र मन से दिन के प्रारंभ से दिन के अंत तक की समस्त गतिविधियों की समीक्षा करें |

इस प्रक्रिया में एकाग्रता और स्थिर मन परम आवश्यक है |

आत्मविश्लेषण का प्रत्येक के मानव जीवन में अपने आत्मिक स्तर को ऊंचा उठाने में बहुत महत्त्व है | फिर युवाओं एवं छात्र/|छात्राओं के लिए ये अत्यंत उपयोगी है | क्योंकि इससे शान्ति एवं एकाग्रता को बढ़ाने का अवसर  तो मिलता ही है, स्मृति शक्ति में वृद्धि का अवसर अनायास ही प्राप्त हो जाता है | इस प्रकार आत्म्विश्लेषम के  सफल क्रियान्वयन से हमारी आत्मा व् तन ,मन एवं मस्तिष्क में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है | परिणाम स्वरुप जो आत्मविश्वास हमें प्राप्त होता है | वही हमरा व्यक्तित्व होता है | इसी व्यक्तित्व की सहारे  समाज हमें भीड़ से पृथक करता है | इस प्रकार के व्यक्तित्व को आत्मविश्लेषण के माध्यम से आप अर्जित कर अपने जीवन स्तर को उन्नत बना सकते है |

किन्तु आत्मविश्लेषण करने के लिए शांत व् एकाग्र मन:स्थिति की आवश्यकता होती है  इस मानसिक शान्ति व एकाग्रता के लिए जो प्रमुख कारक है उन्हें भी समझ लेना चाहिए |

समय प्रबंधन, स्वअनुशासन ,मर्यादा एवं आपकी सकारात्मक व्यस्तता का विशेष योगदान होता है |

सर्व प्रथम समय प्रबंधन की आवश्यकता है |

मेरे विचार से समय के सटीक समय प्रबंधन से हम अपना 70 % तक समय बचा सकते है | जोकि प्रायः हम अपनी नादानी से समय प्रबंधन के अभाव में व्यर्थ गँवा देते हैं | हमें यह समझना होगा कि किसी भी सफल व्यक्ति अथवा उच्चपदासीन , साहित्यकार,  वैज्ञानिक , समाज सेवक राजनीतिज्ञ  अथवा व्यव्सयी के पास भी हमारे सामान ही  24 घंटे का समय होता है | कोई इस समय का उपयोग करके महान बन जाता है ,तो कोई समय को व्यर्थ गवां देता है |

समय प्रबंधन जैसे विषय पर हमें अनेकों विद्वानों के लेख एवं विडियो इन्टरनेट पर मिल जाती है | जिनमें समय प्रबंधन को अनेकों प्रकार से हमें समझाया गया है | समय प्रबंधन को सार रूप से सरलतम तरीके से समझने के लिए  मात्र  तीन प्रश्नों को स्वयं से पूछ कर अपना आकलन कर सकते है | अपने समय को प्रबंधित कर सकते है |

तीन प्रश्नों को स्वयं से पूछ कर अपना आकलन करें 

प्रथम – प्रतिदिन जो कार्य हम पूरे दिन में  संपादित करते है क्या वेह सभी कार्य हमारे लिए उपयोगी होते है ?

द्वितीय – जिन कार्यों  में हमारा समय व्यतीत होता है क्या उन कार्यों को कम समय में भी किया जा सकता है ?

तृतीय – अंत  में जो कार्य मेरे द्वारा किये गए उनका मुझ पर, मेरे परिकर पर  तथा समाज पर क्या प्रभाव हुआ ? अथवा उनका क्या लाभ हुआ ?

वास्तव में  इन  प्रश्नों के बारे हम कभी विचार नहीं करते | बल्कि हम निरंतर स्वयं को खुश रखते हुए अपनी व्यस्तता के प्रचार में व्यस्त रहते है | किन्तु सच्चाई यह है कि हम व्यस्त तो रहे किन्तु निरर्थकता में ,व्यस्तता  से हमने अपना समय व्यतीत किया | जिसका कोई लाभ हु नहीं था |

इस निरर्थक व्यस्तता एवं समय के अपव्यय को रोकने तथा अपनी व्यस्तता को सार्थकता में बदलने की कुछ सामान्य व सरल ट्रिक्स बताता हूँ | इन्हें समझकर इनके पालन से आप भी समय प्रबंधन का सफलतापूर्वक  लाभ उठा सकते है |

समय बचने की क्या है ट्रिक्स –

सम्पूर्ण दिन के कार्यों को बिन्दुवार नोट करे | और अनावश्यक कार्यों को अलग नोट करें |

आवश्यक एवं उपयोगी कार्यों में  व्यतीत समय का विश्लेषण करें | नोट करें कि कौन से कार्य में  आपने कितना समय आपने व्यतीत किया | और वास्तव में इन कार्यों के लिए कितना समय आवश्यक था |

अंत में आपके कार्यों का प्रभाव क्या था ? और उनका आपके लिए लाभ क्या हुआ ?

निष्कर्षों के आधार पर अगले दिन का चार्ट तैयार करे |

इस चार्ट में रचनात्मक ,आवश्यक एवं उपयोगी कार्यों  को प्राथमिकता दें |

निरर्थक एवं अनुपयोगी कार्यों में समय गंवाने से बचे |

अपने कार्यों को आवश्यकता अनुसार  उचित समय दें |

प्रतिदिन अपने कार्यों का आकलन करें |

अगले दिन का चार्ट तैयार कर समय बचाने का प्रयास करें |

आप देखेंगे कि आपके पास आश्चर्यजनक रूप से समय ही समय होगा | इस समय का उपयोग आप सार्थक कार्यों में करिए, अध्यन करिए , सकारात्मक एवं रचनात्मक कार्य करिए | इन सब के लिए आपके पास समय ही  समय होगा | इस प्रकार समय प्रबंधन आत्मविश्वास में वृद्धि कर  आपका व्यक्तित्व विकसित करता है |

इसमें अन्य सहायक कार्य जैसे संवाद की शैली , मर्यादा,  स्वअनुशासन  तथा अन्य कारकों के बारे में क्रमशः अगले एपिसोड में विमर्श करेंगे | तबतक ईमानदारी से आप आत्मविश्लेषण करते हुए समय प्रबंधन का प्रयास करिए एवं सफल बनिए  |

धन्यवाद

आपका कोई प्रश्न या जिज्ञासा है , तो आप कमेंट्स बॉक्स में पूछ सकते है | हम कोशिश करते है कि हमारा उत्तर आपको संतुष्टि प्रदान करे |

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