लोक कला एवं शास्त्रीय कला

लोक कला का एक रूप जो आदिम कला एवं शास्त्रीय कला से भिन्न है | लोक कला से तात्पर्य ये है कि साधारण रूप से संसार में व्याप्त अथवा लोगों में प्रचलित कला को लोक कला कहा जाता है | यद्दपि इस कला को कृषक या ग्रामीण कला आदि नाम भी दिए गये हैं तथापि सर्वाधिक प्रचलित नाम लोक कला  ही है | लोक कला शास्त्रीय कला की अनुकृति पर नही चलती ,अतः इसे शास्त्रीय कला का विकृत रूप नही समझना चाहिए | इसे अपरिष्कृत लोगों द्वारा स्थानीय रूप में चली आ रही आदिम परम्पराओं के आधार पर विकसित समझना चाहिए , जिस पर बाहरी प्रभाव नही पड़ते | विभिन्न विशेषताओं के अधार पर लोक कला की अपनी छवि है |(विस्तार से पढ़ें)

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