आधुनिक चित्रकला में टेक्निक का महत्त्व

आधुनिक चित्रकला में आज विषय वस्तु से टेक्निक का महत्त्व अधिक हो गया है | कलाकार रंग रेखा आकृति आदि के प्रयोग से किसी भी कृति को निर्मित करता है | जिसके लिए उसे विभिन्न प्रकार की घटनाएँ या भाव उद्वेलित करते हैं | इस प्रकार चित्रों के निर्माण में प्रयुक्त ये रंग आकार रेखा आदि एक माध्यम होते हैं | किन्तु जब ये माध्यम कलाकार के द्वारा कोई विशेषता ग्रहण करते हैं | अर्थात कलाकार कहीं हल्के ,कहीं चटख , कहीं कठोर ,कहीं कोमल रेखा तथा स्ट्रोक या फिनिशिंग में कृति को पूर्ण करता है तो यह उसकी सम्पूर्ण तकनीक कलाकार की होती है | आज चित्रकला में प्रयोग का युग है |विभिन्न कलाकारों अपनी कला में विभिन्न तकनीकों का प्रयोग करते  हैं |

कलाकार जब इस प्रकार अपनी किसी तकनीक से, किसी भी भावना के माध्यम से ,किसी भी विषय को चुनकर अपनी कृति को तैयार करता है | विषय वस्तु से तात्पर्य यह है कि कलाकार जब राधा कृष्णा के प्रेम को अपना विषय चुनता है तो वह साधारण स्त्री- पुरुष के माध्यम से राधा कृष्ण को ही प्रस्तुत करता है | किन्तु इस कार्य में वह तभी सफल हो पाता है ,जब राधा कृष्णा के आस -पास की समस्त पृष्ठ भूमि यह बोल उठे कि यह युगल राधा कृष्ण ही हैं | उद्यान ,कृष्णा के हाथ में बांसुरी ,मुकुट में मोर का पंख ,पास में कदम्ब का वृक्ष और पुष्पों से आच्छादित झुरमुट आदि | दर्शक चित्र में वृन्दावन में अपने आप को अनुभव करे | इस प्रकार विषय वस्तु और तकनीक किसी भी चित्र के दो महत्वपूर्ण पक्ष हैं |

अब प्रश्न यह है कि आज आधुनिक चित्रकार विषयवस्तु से अधिक् तकनीक को ज्यादा महत्त्व देते हैं | इस हेतु एक उदाहरण प्रासंगिक है कि- सृष्टि के प्रारंभ के साथ मानव को सर्वप्रथम भूख का दबाब ही सहना पड़ा होगा ,इसके निदानरूप में उसने कच्चा मांस अथवा कच्ची वनस्पति से ही अपनी भूख शांत की होगी | जब उसे आग का ज्ञान हुआ होगा तो उसने अपने इस खाद्यों को भून कर खाया होगा | इसी क्रम में जैसे जैसे उसका ज्ञान बढ़ता गया उसने स्वाद को भी तरजीह देना शुरू किया होगा |

अब मानव को जो भोजन  लज़ीज़ लगता है, उस लाजीज्पन का कारण उस भोजन को बनाने की तकनीक है | अब वह स्वाद के लिए विभिन्न तकनीकें और मसालों का प्रयोग करते -करते खाद्य का वास्तविक स्वाद ही भूल गया | निश्चय ही यही स्थिति चित्रकला के सन्दर्भ में हो चुकी है | चित्रकला में भी तकनीक का प्रभाव बढ़ता जा रहा है | विषयवस्तु के माध्यम से कलाकार दर्शक को अपने चित्र से जोड़ने में समर्थ होता है |किन्तु आज कला युग प्रयोग का युग है ,कलाकार अपने चित्रों में नित नए प्रयोग करता रहता है | और इस प्रकार जो चित्र निर्मित होता है | वह चित्र दर्शक को जोड़ता तो है किन्तु केवल इस सीमा तक कि दर्शक कलाकार के हस्तलाघव तक ही सीमित रह जाता है | उसके भावों तक नही पहुँच पाता |

आज के युग में ऐसे कलाकारों का आधिक्य है ,जो कम से कम समय में अधिक आकर्षक चित्र दर्शक के समक्ष प्रस्तुत कर देते हैं | स्वभावतः वह नए नए प्रयोगों से यह सब करने में सक्षम हो पाते हैं और अनायास ही हस्तलाघव का प्रदर्शन कर ,विषयवस्तु से दूर हस्तलाघव तक ही सीमित रह जाता है |

अतः हम कह सकते हैं कि की आधुनिक चित्रकला में विषयवस्तु से तकनीक का महत्त्व अधिक दिखाई पद रहा है , साथ ही हम ये भी कह सकते हैं कि नए नए प्रयोग कलाकार को कला के मूल आधारों से विमुख करते जा रहे हैं |

<strong>Prashant Tripathi</strong>
Prashant Tripathi
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