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मेरी इक्कीस कवितायेँ

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21 poems
23 pages

Category:

Description

स्त्री-पुरुष प्रेम का प्रतीक हैं | या यूँ कहिये कि जन्म-जन्मान्तर से व्यथित नारी रुपी आत्मा पुरुष रुपी परमात्मा में विलीन होने को आतुर दिखती है | इस प्रकार का प्रेम सांसारिक पक्ष की वासना को प्रस्तुत करता हुआ भी लोकोत्तर या पारलौकिक है | प्रेम की विभिन्न अवस्थाएं – संयोग,वियोग,अन्बीक्षा,पीड़ा,रूठना-मनाना एवं अधिकार आदि के भावों को शब्दों में समेटने का प्रयास किया है |

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