लगता है खुदा ने दिल बनाने का काँन्ट्रेक्ट चाईना को दे दिया है, आज कल बहुत टूट रहे हैं…!!

वो छोरी मुझसे बोली मेरा भाई बहुत बडा बदमाश है | मैने उसको कहा जा अपने भाई ने कह दे तेरी टक्कर का जीजा मिल गया है |

यूँ झटके दे दे कर ना डराया कर ऐ कुदरत , ये इँसान है समझेगा ज़रूर सुधरेगा नहीं |

कुछ Relationship के बर्बाद होने में दूरियों का कम 2G इंटरनेट का ज्यादा हाथ होता है |

हम तो हँसते हैं दूसरो को“हंसाने की खातिर”.. दोस्तों वरना “दिल पे ज़ख़्म” इतने हैं कि रोया भी नहीं जाता |

दिल चाहते हो या जान चाहते हो ,हमसे बताओ कि क्या चाहते हो |

जहां पर ना हो अपनी कदर…  वहां पर जाना है बेकार.. चाहे वह किसी का दिल हो- या फिर क्यों ना हो किसी का घर..

मेरी लिखी किताब मेरे ही हाथो मे देकर वो कहने लगे, इसे पढा करो मोहब्बत करना सिख जाओगे!

तुम्हारी याद के सहारे जिए जाते हैं; वरना हम तो कब के मर गए होते; जो जख्म दिल में नासूर बन गए; जख्म वो कब के भर गए होते।

यादों को भुलाने में कुछ देर तो लगती है; आँखों को सुलाने में कुछ देर तो लगती है; किसी शख्स को भुला देना इतना आसान नहीं होता; दिल को समझाने में कुछ देर तो लगती है।

अकेला सा महसूस करो जब तन्हाई में; याद मेरी आये जब जुदाई में; महसूस करना तुम्हारे करीब हूँ मैं; जब चाहे देख लेना अपनी ही परछाई में!

हर लम्हा हम उन्हें याद करते रहे; उनकी याद में मर-मर के जीते रहे; अश्क़ आँखों से हमारी बहते रहे; जुदाई में उनकी हम अश्क़ों के जाम पीते रहे।

आज भी सूना पड़ा है हर एक मंज़र; तेरे जाने से सब कुछ वीरान लगता है; उस रास्ते पे आज भी हम तेरी राह देखते हैं; जहाँ से तेरा लौट आना आसान लगता है।

थक गए हम उनका इंतज़ार करते-करते; रोए हज़ार बार खुद से तकरार करते-करते; दो शब्द उनकी ज़ुबान से निकल जाते कभी; और टूट गए हम एक तरफ़ा प्यार करते-करते।

कोशिश करो कोई आपसे ना रूठे, ज़िन्दगी में अपनों का साथ ना छूटे, दोस्ती कोई भी हो उसे ऐसा निभाओ, की उस दोस्ती की डोर ज़िन्दगी भर न टूटे।

कुछ उलझे हुए सवालों से डरता है दिल, ना जाने क्यों तन्हाई में बिखरता है दिल, किसी को पाना कोई बड़ी बात नहीं, बस दोस्तों को खोने से डरता है दिल..

आंसू बहे तो एहसास होता है, दोस्ती के बिना जीवन कितना उदास होता है , उम्र हो आपकी चाँद जितनी लम्बी, आप जैसा दोस्त कहाँ हर किसी के पास होता है। .

काग़ज़ काग़ज़ हर्फ़ सजाया करता है, तन्हाई में शहर बसाया करता है, कैसा पागल शख्स है सारी-सारी रात, दीवारों को दर्द सुनाया करता है, रो देता है आप ही अपनी बातों पर, और फिर खुद को आप हंसाया करता है।

मेरे दिल ने जब भी दुआ माँगी है, तुझे माँगा है तेरी वफ़ा माँगी है, जिस मोहब्बत को देख के दुनिया को रश्क आये, तेरे प्यार करने की वो अदा माँगी है।

सर्द रातों में सताती है जुदाई तेरी, आग बुझती नहीं सीने में लगाई तेरी, तू तो कहता था बिछड़ के सुकून पा लेंगे, फिर क्यों रोती है मेरे दर पे तन्हाई तेरी।

तुमने जो दिल के अँधेरे में जलाया था कभी, वो दिया आज भी सीने में जला रखा है, देख आ कर दहकते हुए ज़ख्मों की बहार, मैंने अब तक तेरे गुलशन को सजा रखा है।

किसी का हाथ थाम के छोड़ना नहीं, वादा किसी से कर के तोड़ना नहीं, कोई अगर तोड़ दे दिल आपका तो, बिना हाथ पैर तोड़े उसे छोड़ना नहीं।

दिल के दरिया में धड़कन की कश्ती है, ख़्वाबों की दुनिया में यादों की बस्ती है, मोहब्बत के बाजार में चाहत का सौदा है, वफ़ा की कीमत से तो बेवफाई सस्ती है।

नज़र नवाज़ नजारों में जी नहीं लगता, फ़िज़ा गई तो बहारों में जी नहीं लगता, न पूछ मुझसे तेरे ग़म में क्या गुजरती है, यही कहूंगा हजारों में जी नहीं लगता।